कल्पना कीजिए: "मैं कौन हूँ?" का खेल, लेकिन... अकेले! यह सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि आत्मनिरीक्षण का एक अनूठा अनुभव है। एलेन डीजेनेरेस द्वारा 2013 में लोकप्रिय बनाया गया ऐप "हेड्स अप!" बेहद लोकप्रिय हो गया है। क्या होगा अगर आप खुद ही अपने दर्शक हों? इस खेल की उत्पत्ति दर्शनशास्त्र में निहित है। 17वीं शताब्दी में, ब्रिटिश विचारक जॉन लॉक ने तर्क दिया कि पहचान चेतना और स्मृति द्वारा निर्मित होती है। ये अदृश्य "लेबल" हमारे वास्तविक स्वरूप को परिभाषित करते हैं। आधुनिक मनोविज्ञान इसकी पुष्टि करता है। 1978 में, एलेन लैंगर ने दिखाया कि बाहरी लेबल किस प्रकार लोगों की आत्म-धारणाओं को बदलते हैं। सोशल मीडिया के युग में, हम प्रतिदिन दर्जनों आभासी "मैं कौन हूँ?" जैसे सवालों को आजमाते हैं। कलाकार भी इस विषय पर विचार-विमर्श करते हैं। मरीना अब्रामोविच की प्रस्तुतियाँ अक्सर बाहरी प्रतीकों के माध्यम से पहचान के मुद्दे को उठाती हैं। यह आंतरिक "खेल" हमारी छिपी हुई मनोवृत्तियों और मान्यताओं का 70% तक खुलासा कर सकता है। जैसा कि इरविंग गोफमैन ने 1959 में अपनी पुस्तक "रोजमर्रा की जिंदगी में स्वयं की प्रस्तुति" में वर्णित किया है, हम एक दिन में लगभग 20 सामाजिक भूमिकाएँ निभाते हैं। आज आप कौन सी "भूमिका" निभा रहे हैं?