1889 में, अमेरिकी अंतिम संस्कार व्यवसायी अल्मन ब्राउन स्ट्रॉगर को एक असामान्य प्रतिस्पर्धी लाभ का सामना करना पड़ा। उनका प्रतिद्वंदी कोई दूसरा व्यवसाय नहीं था, बल्कि एक ऐसा व्यक्ति था जो सचमुच उनकी कॉल को बाधित कर रहा था। इस समस्या ने दूरसंचार की दुनिया को पूरी तरह से बदल दिया। मिसौरी के कैनसस सिटी निवासी स्ट्रॉगर ने देखा कि उनके अंतिम संस्कार गृह में आने वाली कॉल लगातार रीडायरेक्ट हो रही थीं। इसका कारण स्थानीय पीबीएक्स ऑपरेटर थी। वह जानबूझकर ग्राहकों को अपने पति के प्रतिद्वंद्वी, जो कि एक अंतिम संस्कार गृह भी था, से जोड़ रही थी। इस अन्याय से स्ट्रॉगर इतना क्रोधित हुआ कि उसने मानवीय हस्तक्षेप को ही समाप्त करने का निर्णय लिया। उसने एक ऐसी प्रणाली की कल्पना की जिसमें ग्राहक ऑपरेटर की आवश्यकता के बिना सीधे डायल कर सकें। इस प्रकार स्वचालित टेलीफोन संचार का मूल सिद्धांत अस्तित्व में आया। 1891 में, स्ट्रॉगर को अपने चरणबद्ध टेलीफोन एक्सचेंज के लिए पेटेंट प्राप्त हुआ। पहला वाणिज्यिक एक्सचेंज, स्ट्रॉगर ऑटोमैटिक टेलीफोन एक्सचेंज कंपनी, 1892 में ला पोर्ट, इंडियाना में खोला गया। इससे मैनुअल टेलीफोन ऑपरेटरों का एकाधिकार समाप्त हो गया। एक लालची स्विचबोर्ड ऑपरेटर की बदौलत, जिसने दूसरों की कॉल को "बांट" दिया, दुनिया को वो स्वचालित टेलीफोन एक्सचेंज मिले जिनका इस्तेमाल हम आज भी करते हैं। अगली बार जब आप कोई नंबर डायल करें, तो अल्मन स्ट्रॉगर और ईमानदारी से व्यापार करने के उनके संघर्ष को याद रखें।